Sunday, 4 May 2014

नरेन्द्र सिंह नेगी और उनका गीत-संसार # 7

द्वी दिनूँ की हौरि च अब खैरि, मुट बोटी की रख
तेरी हिकमत आजमाणा बैरि, मुट बोटी की रख ||

गरजणा बादळ चमकणी चाल बरखा ह्वे की राली
ह्वे की राली डाँडी-काँठी हैरि, मुट बोटी की रख ||

घणा डाळौं बीच छिड़की औलु घाम तेरा मुलुक भी
सेक्कि पाळै द्वी घड़ी छिन हौरि, मुट बोटी की रख ||
 
जौं सहीदू की चितौं थैं आग देकी बैठी गे तू 
तौंकी तसवीरूँ जथैं भी हेरि, मुट बोटी की रख ||

सच्चु छै तू, सच्चु तेरू ब्रह्म, लड़ै सच्ची तेरी
झूठा द्यब्तौं कि किलकऱयूँन ना डैरि, मुट बोटी की रख ||

सन इक्यावन बिटि ठगौणा छिन यु त्वे सुप्न्या दिखैकी
ऐंसू भी औला चुनौ मा फेर,  मुट बोटी की रख ||
 

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