Friday, 2 May 2014

नरेन्द्र सिंह नेगी और उनका गीत-संसार # 1

लयूँ छौ भाग छाँटी की, दियूँ छौ वेकु अंजळ्यूँन
सला बिरणी सगोर अपडू नि खै जाणि क्य कन तब |

मनु औणान सैंत्या गोर पळ्याँ कुकुर घुराणा छिन
कि जौंका बाना बिसरू हैंसणु, वी अपड़ा रुवाणा छिन
निसाब अपडू अफी जब क्वी नि कै जाणि क्य कन तब |

लयूँ छौ भाग छाँटी की, दियूँ छौ वेकु अंजळ्यूँन ||

जु ल्हीगी पैंछु ह्यूँद्यू घाम रूढ़ी आई लौटाँणु
कि चोरी जैन ज्वानि मा कै बुढेन्दा राई सौं खाँणूं
निसाब अपडू अफी जब क्वी नि कै जाणि क्य कन तब |

लयूँ छौ भाग छाँटी की, दियूँ छौ वेकु अंजळ्यूँन ||

हो जै बिरधी वूं बैऱयूँ की जु पीठि मा घौ लगै गैनी
रयाँ राजी वु दगड्या भी, जु मौळ्याँ घौ दुखै गैनी
निसाब अपडू अफी जब क्वी नि कै जाणि क्य कन तब |

लयूँ छौ भाग छाँटी की, दियूँ छौ वेकु अंजळ्यूँन ||

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