Saturday, 4 April 2015

घुघूती घुरौण लगी - गढ़वाली से हिंदी में अनुदित !!

मेरे मायके की घुघूती बोलने लगी है
आते-आते चैत्र - ऋतु आ ही गयी

ऊँची पहाड़ियों की बर्फ पिघल चुकी होगी
और मेरे मायके का जंगल फिर हरा-भरा हो चुका होगा
पंछियाँ अपने घोंसलों को छोड़कर उड़ने लगी होंगी  
और बेटियाँ मायके जाने की तैयारियाँ कर रही होंगी

मेरे मायके की घुघूती बोलने लगी है...

जंगलों में बुरुंश के फूल खिल रहे होंगे
और चट्टानों पर फ्योंली के फूल मुस्कुरा रहे होंगे
फुल्यारी फूल-पत्तियां लेकर दहलीजों पर जा रही होंगी
और दोस्त-साथी थैड्या-चौखुल्या नृत्य कर रहे होंगे

मेरे मायके की घुघूती बोलने लगी है...

पिताजी आँगन में उदास बैठे होंगे
और माँ चढ़ती साँस के साथ रास्ता देख रही होगी
कब मेरे मायके के ढोल-वादक दिशा-भेंट आयेंगे
कब मेरे भाई-बहिनों की कुशल खबर लायेंगे

मेरे मायके की घुघूती बोलने लगी है...

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